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...मगर कौन ?
4th May 2015

कतरे-कतरे में साज़ बसा है
गीत अगर सुन पाए कोई

 

ओस कहाँ किसी मोती से कम
उसे अगर चुन पाए कोई

 

है ज़र्रा-ज़र्रा राज़ छुपाए
तफ़तीश अगर कर पाए कोई

 

है नशा बड़ा अल्फाज़ों मैं
क्यूँ में को हाथ लगाए कोई

 

पर लफ़्ज़ों का मोहताज क्यूँ होना
जो खामोशी पढ़ पाए कोई

 

~आशीष वैद्या

Poem by Ashish Vaidya
Ashish Vaidya
Comments (3)

Anita Tejwani
BEAUTIFUL!!!
3rd June 2015
komal bhopi
Superb....
21st May 2015
Shruti Balasa
So beautiful this piece of writing is!
4th May 2015

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